पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
आज होगा प्रतिपदा का पिंडदान, 6 अक्टूबर तक पितृपक्ष
पितृ पक्ष में धरती पर आएंगे पूर्वज, बनेगें कई शुभ संयोग
पितरों के प्रति आस्था निवेदित करने का पर्व पितृपक्ष 21 सितंबर से शुरू हो रहा है। यह छह अक्तूबर पितृ विसर्जन तक चलेगा। वहीं भाद्रपद मास की पूर्णिमा के दिन जिनके पितरों की मृत्यु हुई है वह 20 सितंबर को ही पितरों का श्राद्ध कर्म किए। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से 15 दिन पितृपक्ष मनाया जाता है। इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी पुण्यतिथि पर श्राद्ध करते हैं। पितरों का ऋण श्राद्ध के माध्यम से चुकाया जाता है। वर्ष के किसी भी मास, तिथि में स्वर्गवासी हुए अपने पितरों के लिए पितृपक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है। बताया कि श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धा से जो कुछ दिया जाए। पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितृगण वर्ष भर तक प्रसन्न रहते हैं और कृपालु होते हैं।
ऐसे करें श्राद्ध व तर्पणादि
स्नान के बाद पितरों का तर्पण करने के लिए सबसे पहले हाथ में कुश लेकर दोनों हाथों को जोड़कर पितरों का ध्यान करें और उन्हें अपनी पूजा स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करें। पितरों को तर्पण में जल, तिल और फूल अर्पित करें। इसके साथ ही जिस दिन पितरों की मृत्यु हुई है, उस दिन उनके नाम से और अपनी श्रद्धा और यथाशक्ति के अनुसार भोजन बनवाकर ब्राह्मणों को दान करें। कौवा और श्वान में भी भोजन वितरित करें।
श्राद्ध करने वाले नहीं करें ये काम
जो श्राद्ध करने के अधिकारी हैं उन्हें पूरे 15 दिनों तक पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। प्रतिदिन स्नान के बाद तर्पण करके ही कुछ खाना पीना चाहिए। तेल-उबटन आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए।आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या को पितृ विसर्जनी अमावस्या या महालया कहते हैं। जो व्यक्ति पितृ पक्ष के 15 दिनों तक श्राद्ध और तर्पण नहीं करते हैं, वे अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त जिन पितरों की तिथि ज्ञात नहीं, वे भी श्राद्ध-तर्पण अमावस्या को ही करते हैं। इस दिन सभी पितरों का विसर्जन होता है।
कब होगें कौन से श्राद्ध
20 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध
21 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध
22 सितंबर को द्वितीया श्राद्ध
23 सितंबर को तृतीया श्राद्ध
24 सितंबर को चतुर्थी श्राद्ध
25 सितंबर को पंचमी श्राद्ध
26 सितंबर को षष्ठी श्राद्ध
28 सितंबर को सप्तमी श्राद्ध
29 सितंबर को अष्टमी श्राद्ध
30 सितंबर को नवमी (मातृ नवमी श्राद्ध)
01 अक्तूबर को दशमी श्राद्ध
02 अक्तूबर को एकादशी श्राद्ध
03 अक्तूबर को द्वादशी श्राद्ध
04 अक्तूबर को त्रयोदशी श्राद्ध
05 अक्तूबर को चतुर्दशी श्राद्ध (घात चतुर्दशी)
06 अक्तूबर को अमावस्या श्राद्ध और पितृ विसर्जन
आलेख...
पं. चेतन पाण्डेय
जन्मकुंडली, वास्तु व कर्मकाण्ड परामर्श
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