पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
पलामू समाचार केंद्र
दीपक तिवारी
मेदिनीनगर प्रतिनिधि
जन्नत जाने की चाहत में की खुदकुशी, फांसी लगाने से पहले माँ से पूछा था ये सवाल
किसी भी मान्यता के प्रति आस्था व विश्वास होना सही माना जाता है. पर जब वही विश्वास, अंधविश्वास में बदल जाता है तो लोगों को कई बार अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ जाता है। ऐसी ही घटना सामने आई है इंदौर के रावजी बाजार क्षेत्र के चंपा बाग स्थित हाथीपाला से. इंदौर में 15 वर्षीय छात्रा ने मुहर्रम के दिन फांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर ली। ख़ुदकुशी करने से पहले मां से बच्ची ने एक सवाल पूछा था। छात्रा ने पूछा था कि “इमाम हुसैन इसी दिन शहीद हुए थे क्या। क्या आज के दिन मरने वालों को शहादत मिलती है, वो जन्नत जाते है?” इसके जवाब में मां ने बच्ची को जवाब दिया था “हां” इस वाकये के कुछ देर बाद ही छात्रा ने फांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर ली। परिवार के लोगों ने जब छात्रा को फंदे से उतारकर अस्पताल लाया, जब वहां के डॉक्टर ने उसे वहां मृत घोषित कर दिया।विज्ञापन
2 दिन पहले ही आई थी नई किताबें
परिवार के सदस्यों ने बताया है कि छात्रा का नामाकंन कुछ दिन पहले ही 11वीं कक्षा में नामांकन कराया गया था. पढ़ने के लिए उसकी किताबें भी दिन दिन पहले कि बाज़ार से खरीदकर लाई गई थी। कुछ दिन पहले एक पिकनिक के दौरान उसकी एक मित्र की मौत झूले से द्गिरने के कारण हो गयी थी। जिसके बाद उसकी मानसिक संतुलन थोड़ी बिगड़ गयी थी। परिज़नों ने बताया कि वो इस घटना के बाद से जिंदगी और मौत के बीच का अंतर जानना चाहती थी। मौत के बाद इंसान कहा जाता है? हम कभी भी मर सकते है ऐसी बहकी-बहकी बातें किया करती थी. जिसके लिए कई बार परिवार वालों ने उसे डांट भी लगाई थी। लेकिन सहेली कि मौत के बाद वो अपने मानसिक स्थिति से उभर नहीं पायी थी।
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