पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
पलामू मेडिकल कॉलेज में नए बैच का मूलभूत सुविधाओं एवं शिक्षकों की कमी के चलते नामांकन अधर में लटका: सांसद
पलामू समाचार केंद्र
दीपक तिवारी
मेदिनीनगर प्रतिनिधि
NMCके द्वारा Recognition मिलने की संभावना क्षीण: सांसद
विदित है कि केन्द्र सरकार ने देश भर में 17 आई.आई.टी. एवं 17 एम्स सहित जगह-जगह पर अनेकों मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी उसमें से पलामू मेडिकल कॉलेज भी एक था। इसका शिलान्यास झारखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री रघुबर दास ने 23 फरवरी 2017 को किया था। वर्ष 2019 में पहले बैच का नामांकन हुआ था। परंतु आप जानते हैं कि कॉलेज में मूलभूत कमियों के चलते NMC ने पिछले वर्ष मान्यता नहीं दी। इस वर्ष भी कॉलेज में शिक्षकों की कमी है। कुछ नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है परंतु वे NMC के अनुसार पूर्ण नहीं है। कॉलेज में लैब की समस्या का समाधान नहीं किया गया। अगर कॉलेज की स्थिति इसी प्रकार बनी रही तो, पिछले वर्ष के भांति इस वर्ष भी इसे 100 सीटों से वंचित रहना पड़ेगा और जिन छात्रों का नामांकन सत्र 2019 में हुआ है उन्हें भी Recognition मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। राज्य में डॉक्टरों की कमी पहले से है और अगर इसी प्रकार कॉलेज में नामांकन की प्रक्रिया को हर वर्ष रोक दिया जाएगा तो समस्याएं बढ़ती जाएंगी।विज्ञापन
कॉलेज में Lab Assistant और para medical staff, medical equipment और Technician न होने के कारण छात्रों को विषयों को समझने में काफी परेशानी होती है। कॉलेज में पुस्तकालय एवं पुस्तकालय कर्मी की भी व्यवस्था नहीं है जिसके कारण छात्र-छात्राओं को मेडिकल की महंगी किताबें खरीदनी पड़ती है। NMC (National Medical Comission) के आदेशानुसार एम.बी.बी.एस. विद्यार्थियों का अनिवार्य Clinical Expossure एवं Hospital Visit नहीं हो पा रहा है। छात्रावास में बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली और सुरक्षा का भी अभाव है। कॉलेज से अस्पताल 5 किमी दूर होने के बावजूद यातायात की कोई सुविधा नहीं है।
मैंने पूर्व में इन सारी कमियों की ओर माननीय मुख्य मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट कराया है। पूर्व में किए गए पत्राचार की प्रतिलिपि संलग्न है।
झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं के लिए भोजपुरी, मगही तथा हिंदी भाषा को भी क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में मैं शामिल करने की मांग करता हूं । अभी जो भी भाषा इन परीक्षाओं के लिए शामिल की गई है वह यहां की भाषा है ही नहीं और यहां के छात्र अंग्रेजी में परीक्षा नहीं दे सकते यहां के छात्रों को भोजपुरी एवं मगही में परीक्षा देने की सुविधा नहीं देना चाहते हैं तो कम से कम हिंदी भाषा में छात्रों को परीक्षा देने की सुविधा हो मेरी पार्टी इसके लिए निश्चित रूप से आंदोलन करेगी आम जनता तो कहती है कि माननीय मंत्री जी ने लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है जिस दिन यह प्रस्ताव कैबिनेट में पास हो रहा था उस दिन मंत्रीजी भी वही थे तो फिर उस दिन उन्होंने इसका विरोध क्यों नहीं किया बाद में विरोध करने से क्या फायदा उन्होंने कहा कि इससे पलामू एवं गढ़वा जिले के छात्रों का भविष्य अंधकार में हो जाएगा उन्होंने पलामू एवं गढ़वा के छात्रों को छलने का काम किया है
Comments
Post a Comment