पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
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दीपक तिवारी
डाल्टेनगंज(07 फ़रवरी, रविवार) दुनियाँ में कोई भी उत्सव आयोजित करने के पीछे उसका मकसद होता है उसके अनुरूप चलना उससे प्रेरणा लेना और वर्तमान को बेहतर गढ़ना।इसके लिए करना नहीं मरना पड़ता है।
प्रजापिता ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा महाशिवरात्रि महोत्सव का आयोजन किया गया,जिसके विशिष्ट अतिथि अविनाशदेव सदस्य-झारखंड माटीकला बोर्ड, झारखंड सरकार थे। सैकड़ों शिवभक्तों को अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों एवं अनछुए पहलुओं को बताते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्रीय जो कथा है-उसमें आज ही के दिन भगवान शिव अवतरित हुए और आज ही के दिन विवाह भी हुई।समुन्द्र मंथन में चौदह रत्न जो मिला उसमें सबसे ख़तरनाक विष था जो पूरी सृष्टि को बर्बाद व तहसनहस करके रख देता।अन्तोगत्वा शिव को अवतार लेना पड़ा विषपान किये मौत के करीब गए तत्कालीन बैद्ययों ने कहा इसे जगाये रखिए। (आज भी विषधर काटने पर सोने नहीं देते हैं) देवताओं ने गीत संगीत नृत्य का आयोजन किया। जहर कण्ठ में ही सुखा दिए और इस तरह सृष्टि नष्ट होने से बचा दिया। इसीलिए शिव सृष्टि के संहारक नहीं पालक हैं संचालक हैं।
वर्तमान दौर में कोरोना का कहर उस विष से भी ज्यादा विस्फोटक था, जिसने भी बचाव राहत कार्य चलाया निश्चित ही वह शिव शिष्य है। हम सबों को परमार्थ में लगना चाहिए। पूरा विश्व हमारा परिवार है।
एक कथा है एक शिकारी अपरिहार्य कारणों से शिकार नहीं कर सका भूखे जंगल की ओर बढ़ा बेल का फल तोड़ा टहनी पत्ते टूट गए,नीचे गिरा देखा शिव लिंग है नहीं खाया। आगे बढ़ा बारी बारी से तीन हिरन मिले तीनो अपनी लाचारी बता अगले समय में आने को कहा शिकारी छोड़ दिया। जब हिरन आया तबतक सुबह हो चुका था।इस तरह से उपवास, रात्रि जागरण,बेलपत्र शिकारी के जीवन का सुनहरा सकारात्मक अवसर आया और वह पूज्य हो गया।
जीवन के शुरुआती दौर में अविनाशदेव का इसीतरह वक्त गुजरा भूख का सामना,पाने के लिए जागना, सेवा भाव यही कारण है अविनाशदेव युवाओं के रोलमॉडल हैं सफलता के नित्य नये आयाम गढ़ रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी युगपुरुष बनते जा रहे हैं। आज के परिवेश में अविनाशदेव सरीखे युवाओं को समाज एवं राष्ट्र की जरूरत है। बेलगाम भ्रष्टाचार चरम पर है पीड़ित हसरत भरी निगाहों से देख रहा है कोई शिव शिष्य अवतार ले और इस पीड़ा से मुक्त करे।
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