पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
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दीपक तिवारी
पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच आने वाले समय में महंगाई के और बढ़ने के आसार हैं। इससे आमजन की जेब पर बोझ और बढ़ेगा। दैनिक सामान की कीमतें पहले से ही 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी हुई हैं। माल भाड़ा बढ़ने से जरूरत के सामान के दाम फिर से बढ़ेंगे और इसका जनजीवन पर गहरा असर पड़ेगा।
अकेले डीजल की कीमत में बढ़ोतरी से पूरा परिवहन जगत हलकान है। इसमें ट्रांसपोर्टर से लेकर ट्रक संचालक, मजदूर समेत बड़ा वर्ग शामिल है। ट्रक संचालक लगातार ट्रांसपोर्टरों पर माल ढ़ुलाई को लेकर किराया दस से 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर उनके बीच बकझक भी हो रही है। उथल-पुथल के दौर से गुजर रहे परिवहन व्यवसाय में भाड़ा बढ़ने के साथ ही दैनिक जरूरत के अन्य सामान समेत सब्जी तक की कीमत पर इसका असर पड़ेगा।
यह तय माना जा रहा है कि मार्च माह में ट्रांसपोर्टर भाड़ा बढ़ाएंगे। ऐसे में पहले से महंगाई की मार झेल रहे आमजन पर आर्थिक बोझ और बढ़ेगा।
खाद्यान्न से लेकर सब्जी की कीमत बढ़ सकती है
वाहनों का भाड़ा बढ़ने के साथ ही उत्पादक खाद्यान्न से लेकर सब्जी तक की कीमत भी बढ़ाएंगे। उनके माल के परिवहन पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को वे वस्तु की कीमत में ही जोड़ेंगे। ऐसे में वर्तमान कीमत में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी की संभावना व्यापार जगत के जानकार व्यक्त कर रहे हैं। बताया गया कि ट्रांसपोर्ट का कारोबार मांग और आपूर्ति पर चलता है। इसके बावजूद डीजल की कीमत में बढ़ोतरी से मांग और आपूर्ति से इतर वर्तमान स्थिति को लेकर भाड़ा बढ़ाया जा सकता है।
भाड़ा बढ़ने से अन्य वस्तुओं पर ऐसे होता है असर
जिस वाहन से बिना अनुबंध के माल की ढुलाई होती है, उसके संचालक समय के अनुसार भाड़ा बढ़ाते रहते हैं। जिसका असर संबंधित वस्तु की कीमत पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल की कीमत में बढ़ोतरी का ट्रांसपोर्टेशन के अलावा टेक्सटाईल्स, केमिकल और एफएमसीसजी में सभी तरह के उत्पादन सेक्टर प्रभावित होता है। धीरे-धीरे लागत मूल्य बढ़ने से कीमतों में बढ़ोतरी होगी और असर आमजन पर होगा।
अनुबंध पर माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर दुविधा में
जो परिवहनकर्ता छह माह, एक वर्ष या इससे अधिक समय के लिए किसी फैक्ट्री, उद्योग संस्थान से माल ढुलाई के लिए अनुबंध करते हैं, वे अभी दुविधा में हैं। उन्हें तकनीकी प्रावधान की वजह से दिन-प्रतिदिन किराया तय करना सम्भव नहीं होता। ऐसे में परिवहन व्यवसायी के सामने व्यवसाय घाटा पर चलाते रहने या फिर कारोबार समेटने का ही विकल्प होता है। व्यवसाय घाटे पर चलाएं या व्यवसाय बंद कर दें। पेट्रोलियम पदार्थ की कीमत में कमी नहीं की गई तो परिवहन व्यवसायी भाड़ा बढ़ाएंगे। हालांकि उनके सामने बड़ी चुनौती प्रतिस्पर्धा में परिवहन दर बढ़ाने से व्यवसाय जाने के भय को लेकर है। इसी वजह से पेशे से जुड़े लोग लगातार घाटा में चल रहे हैं और ऋण बोझ से दबते जा रहे हैं।
लगातार बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले साल मार्च माह में डीजल की कीमत 64 रुपए प्रति लीटर थी, जो 27 फरवरी को 86.12 रुपए तक जा पहुंची है। करीब एक साल के अंदर डीजल की कीमत में 23 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसी तरह पेट्रोल की कीमत में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।
क्या कहते हैं ट्रांसपोर्टर
सरकार को चाहिए कि आमजन के प्रयोग के सामान की कीमत यथावत बनी रहे तो डीजल-पेट्रोल की कीमत में कमी करना जरूरी होगा। परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को सहूलियत मिलेगी तो भाड़ा नहीं बढ़ेगा और बाजार में स्थिति सामान्य बनी रहेगी। - एसबी सिंह, अध्यक्ष, रांची जिला गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
ट्रांसपोर्ट कंपनी के सामने विकट स्थिति है। बढ़ती महंगाई के बीच वह अपने कर्मचारियों को तनख्वाह दे, गोदाम का भाड़ा दे। ऐसे में भाड़ा नहीं बढ़ने की स्थिति में वह कर्ज के बोझ से लदती जा रही है। - सुनील सिंह चौहान, प्रवक्ता, आरजीटीए, रांची
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