पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
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दीपक कुमार तिवारी
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Chhath Puja 2020: सूर्य देव की आराधना से संतान के सुखी जीवन और परिवार की सुख.समृद्धि की कामना से मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा की जाती है। इस वर्ष छठ पूजा 20 नवंबर शुक्रवार को है। छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला पर्व है, जिसमें हर दिन की अलग-अलग परंपरा और नियम हैं। छठ पूजा का प्रारंभ दो दिन पूर्व चतुर्थ तिथि को नहाय खाय से होता है, फिर पंचमी को खरना होता है। उसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है, जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है। आइए जानते हैं छठ पूजा में किस दिन क्या किया जाएगा।
जानिए... चार दिनी छठ पर्व में किस दिन क्या होगा
पहला दिन : नहाय-खाय : 18 नवंबर बुधवार
छठ पूजा का प्रारंभ क शुक्ल तिथि से होता है। यह छठ पूजा का पहला दिन होता है, इस दिन नहाय खाय होता है। घर की साफ.सफाई की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं.पुरुष स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण करते हैं। शाम को शाकाहारी भोजन किया जाता है। इस दिन घर में चने की दाल, चावल आैर लौकी की सब्जी बनती है। व्रत करने वाले लोग इस दिन एक ही समय भोजन करते हैं।
दूसरा दिन : खरना : 19 नवंबर गुरुवार
छठ पूजा का दूसरा दिन खरना होता है। मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है। इस दिन गुड़ डालकर खीर बनाई जाती है आैर प्रसाद के रूप में इसे ही ग्रहण किया जाता है। इस दिन शाम को एक समय भोजन किया जाता है। भोजन में नमक का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस दिन घर में पान के पत्ते आैर सुपारी रखकर सूर्यदेव की स्थापना की जाती है। शाम के समय रोटी आैर खीर का प्रसाद लिया जाता है। इसके बाद से निर्जल व्रत प्रारंभ हो जाता है। छठ पूजा के लिए षष्ठी तिथि का प्रारंभ 19 नवबंर को रात 09.59 बजे से हो रहा है, जो 20 नवंबर को रात 09.29 बजे तक रहेगी।
तीसरा दिन : मुख्य छठ पूजा, संध्या अर्घ्य, 20 नवंबर शुक्रवार
छठ पूजा का मुख्य दिन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि होती है। इस दिन ही छठ पूजा होती है। इस दिन छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है। अधिकांश स्थानों पर चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। सूप या बांस की टोकरी में नई फसल, सब्जियां, अदरक, नीबू आदि सजाए जाते हैं। शाम के समय नदी, तालाब में पानी में खड़े रहकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
चौथा दिन : सूर्योदय अर्घ्य, पर्व का समापन
छठ पर्व का समापन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर होता है। इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद बांटकर छठ पूजा संपन्न की जाती है।
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