पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
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दीपक कुमार तिवारी
सूदखोरों के चक्कर में आम लोगों को पड़कर बर्बाद होते तो देखा होगा, अब एक सरकारी संस्था की बर्बादी की कहानी भी सुन लीजिए। बिहार से कटकर बना झारखंड राज्य आवास बोर्ड को कुछ ऐसे कर्जे तोहफे में मिले हैं जो ना तो उतर रहे हैं और ना ही इसका समाधान निकल रहा है। यह कर्जा संयुक्त बिहार के समय में लिया गया था और मकसद था आवास बनाकर आम लोगों को सस्ती कीमतों पर मुहैया कराना। ना लाभ और ना नुकसान के आधार पर पूरा काम होना था।
सो, बिहार राज्य आवास बोर्ड (अब झारखंड राज्य आवास बोर्ड) ने वित्तीय संस्थान हुडको से कर्ज लेकर आवासों का निर्माण कराया। 80 के दशक में बने इन आवासों में से कई समय पर बिक नहीं पाए लेकिन इन आवासों पर ब्याज चढ़ता रहा।
13 फीसद की दर से चक्रवृद्धि ब्याज जुड़ते-जुड़ते कीमत कई गुना बढ़ गई है। एचआइजी श्रेणी के लोगों के लिए कभी चार लाख में नहीं बिका मकान अब 90 लाख का हो गया है। खरीदार की तलाश जारी है। सो, समाचार पत्रों में विज्ञापन निकले हैं लेकिन बिक्री होने को लेकर संशय है।
कहानी महज एक घर की नहीं है। जनता फ्लैट नाम सुनकर ही गरीबों के लिए आवास का अनुमान लगने लगता है। एक बेडरूम के इस फ्लैट की शुरुआती कीमत 11 हजार रुपये थी। कई लोगों को यह आवास आवंटित भी हुए हैं और कई रह भी रहे हैं। कुछ खाली रह गए फ्लैटों की कीमत अब 13 लाख रुपये है। शायद ही खरीदार मिले। आवास बोर्ड को ऐसे दर्जनों फ्लैटों के लिए खरीदार की तलाश है। एक दशक में कई बार इनके लिए विज्ञापन भी निकले हैं लेकिन खरीदार जुट नहीं पाए।
चार सौ से अधिक फ्लैट के लिए निकले विज्ञापन में आधे ऐस आवास हैं जो जर्जर हो चुके हैं। ऐसा नहीं कि आवास बोर्ड के सभी फ्लैट पुराने और जर्जर हैं। कुछ नए फ्लैट बनकर तैयार हैं और इनके लिए भी खरीदार की तलाश है। कीमतें मगर उसी तरह से अधिक हैं।
सिम्फनी अपार्टमेंट में बने कुछ आवासों को बेचने के लिए बोर्ड ने विज्ञापन निकाला है जिसकी कीमत 49 लाख रुपये (टू बीएचके फ्लैट) और 75 लाख रुपये (थ्री बीएचके फ्लैट) रखी गई है। ये सभी फ्लैट आसपास के अपार्टमेंट में बने फ्लैटों से महंगे होने के कारण बिक नहीं रहे हैं। इसके बावजूद कुछ आवासों के खरीदार भी जुटेंगे। देखना है बोर्ड के लिए खरीदारों की तलाश कब तक पूरी होती है।
कहां कितने आवास
रांची : 245 फ्लैट
जमशेदपुर : 100
धनबाद : 67
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