पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
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दीपक कुमार तिवारी
झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, नियोजन नीति को किया निरस्त, 18 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी रद
कुछ दिन पूर्व ही इस मामले में अंतिम सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने नियोजन नीति को सही ठहराया।
झारखंड हाई कोर्ट ने नियोजन नीति मामले में आज बड़ा फैसला दिया है। झारखंड सरकार द्वारा बनाए व लागू किए गए नियोजन नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर कोर्ट की पूर्ण पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 18 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। इसके अलावा नियोजन नीति को भी हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। कुछ दिन पूर्व ही इस मामले में अंतिम सुनवाई करते हुए अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने राज्य की नियोजन नीति को सही ठहराते हुए अदालत में कहा कि झारखंड की कई परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही यह नीति बनाई गई है।
प्रार्थी सोनी कुमारी व अन्य ने राज्य की स्थानीय नीति को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर कर नियोजन नीति को चुनौती दी है। पूर्ण पीठ में न्यायमूर्ति हरीश चंद्र मिश्रा, न्यायमूर्ति एस चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति दीपक रोशन शामिल हैं। पिछली सुनवाइयों के दौरान अदालत ने 11 जिलों से स्थगन हटा दिया था। अदालत के फैसले पर इनका भविष्य टिका हुआ था।
राज्य के अनुसूचित 13 जिलों के सभी पद स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। पूर्व में सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। सुनवाई के दौरान पूर्ण पीठ के सभी जज इस बात पर एकमत हुए कि विज्ञापन संख्या 21 के कुछ खंड को अनुसूचित जिले के लिए नए सिरे से विज्ञापन प्रकाशित करने का निर्देश दिया। राज्य के अनुसूचित जिलों में पहले से की गई नियुक्तियां भी रद्द कर दी गई हैं। इसके अलावा राज्यपाल के द्वारा जारी अधिसूचना को भी खारिज कर दिया गया। गैर अनुसूचित जिलों में नियुक्ति होती रहेगी।
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