Skip to main content

चेचनहा विद्यालय में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक  निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...

प्रकृति के वसूलों के साथ छेड़छाड़ करना लोगों के लिए साबित हो सकता है मंहगा: कौशल

पलामू समाचार केंद्र
 दीपक तिवारी 
मेदिनीनगर प्रतिनिधि
+917979886793
पर्यावरणविद के फार्महाउस से निकले सांप को कौशल ने वनों में  जाकर छोड़ा

पशु पक्षी की तरह सांप भी पर्यावरण के अंग और प्रकृति के लगाम के रुप में है, उसे नष्ट ना करें

विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पर्यावरण धर्म व वन राखी मूवमेंट के प्रणेता पर्यावरणविद् कौशल किशोर जायसवाल के कजरी फार्म हाउस में  दुर्लभ प्रजाति के सांप रसेल वाइपर निकला।  रसेल वाइपर ऐसी प्रजाति का सर्प है जो किसी को  डसलें तो उसका कोई इलाज नहीं है।  वावजूद सांप को पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल ने  पकड़ कर सुरक्षित कंडा के वनों में  जाकर छोड़ दिया । उन्होंने  कहा  कि वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा करना केवल वन विभाग के कर्मियों का ही दायित्व नहीं है। बल्कि समाज के हर व्यक्ति  का कर्तव्य है कि उसकी सुरक्षा प्रदान करें। विज्ञापन
पर्यावरण धर्मगुरु कौशल ने कहा है कि जिस प्रकार खेल कला- संस्कृति, पशु पक्षी वन्य पर्यावरण के अंग और राष्ट्र की धरोहर है उसी प्रकार सांप भी पर्यावरण का अंग माना जाता है। इसे प्रकृति पर की लगाम लगाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि जिस प्रकार  हिरण की संख्या अधिक ना हो जाए , वह पालतू जानवरों का भोजन घास ना चट कर जाए उसके लिए प्रकृति ने उसकी संख्या को नियंत्रित रखने के लिए चीता और बाघ को रखा है।  ठीक उसी प्रकार  चूहों की जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि न हो  जाय । उसके लिए भी प्रकृति इंतजाम  कर रखी है। चूहों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए ही प्रकृति सांप रखा है। उन्होंने बताया कि  पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रो में छठा मुल मंत्र में जानवरों की सुरक्षा करना शामिल है।  इसलिए  उन्होंने  सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि सांप को मारकर प्रकृति के लगाम की डोर नहीं तोड़े।  इससे कहीं ना कहीं लोगों  का नुकसान हो सकता है। उन्होंने  समाज के लोगों से पर्यावरण की रक्षा के लिए  वन्य और वन्य प्राणियों को हरसंभव सुरक्षित और संरक्षित करने की अपील की है ताकि इस अभियान को मजबूती प्रदान किया जा सके। इस कार्य में मदद करने वाले शमीम अंसारी रामू और संतोष

Comments