पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
प्लास्टिक बैग फ्री डे आज: धड़ल्ले से हो रहा प्लास्टिक का इस्तेमाल, लॉकडाउन में अधिक हुआ इसका का उपयोग
पलामू समाचार केंद्र
दीपक तिवारी
मेदिनीनगर प्रतिनिधि
हर साल दुनिया भर में करीब 40 हजार करोड़ प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल होता है। उनमें से सिर्फ एक फीसदी थैलियों की रिसाइक्लिंग होती हैं लेकिन इनके उपयोग ने न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है बल्कि यह इंसान और जानवर दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक है। इसी के चलते न केवल देश बल्कि पूरे विश्व में इसके उपयोग पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। केद्र और राज्य सरकार के तमाम प्रयास के बाद भी प्लास्टिक के प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। सामान खरीदने के लिए लोग भी बिना झोला और थैलों के घरों से निकल जा रहे है। वहीं दूसरी सहूलियत के लिए दुकानदार पॉलीथिन में सामान भरकर ग्राहकों को बेच रहे है। पॉलीथिन के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से हर वर्ष तीन जुलाई को इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे मनाया जाता है। इसके बाद भी लोग प्रतिबंधित पॉलीथिन के इस्तेमाल कर रहे हैं।
लॉकडाउन में फिर शुरू हुआ प्लास्टिक का दौर
लॉकडाउन के तीन माह में सिंगल यूज प्लास्टिक का दौर फिर से शुरू हो चुका है। इस तीन माह के दौरान जरूरतमंदों को अनाज उपलब्ध कराने के लिए सिंगल यूज कैरीबैग का खूब इस्तेमाल हुआ। अब हालात ऐसे हैं कि किराना दुकान, सब्जी मार्केट, फल दुकान व ठेलों पर भी सिंगल यूज प्लास्टिक का चलन शुरू हो चुका है। सामान लेने से पहले लोगों की जुबान पर सबसे पहले यही वाक्य होता है, पॉलिथिन है ना। दुकानों में कपड़े की थैली उपलब्ध होने के बाद भी लोग पॉलिथिन को ही उपयुक्त मान रहे हैं। लॉकडाउन की इस समयावधि में प्रशासन की ओर से भी इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाए गए।नतीजतन लोग पूर्व में जारी किए गए फ रमान को भूल चुके हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रति भी लोग चिंतित नहीं हैं। मीट, मछली की दुकानों पर तो जमकर इसका इस्तेमाल जारी है।विज्ञापन
पर्यावरण को खतरा
गौरतलब है कि प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल ने पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। इसके बाद भी लोग पॉलिथिन का प्रयोग बंद नहीं कर रहे हैं। सरकारें इसके इस्तेमाल पर कानूनी रोक लगा कर भी इसका प्रसार रोक नहीं पा रही हैं। प्रशासन कुछ दिन तो इसके खिलाफ कार्रवाई करता है लेकिन कुछ दिनों बाद सब शांत हो जाता है.एनएफ.
पेपर बैग को मिले बढ़ावाआपको बता दें कि प्लास्टिक बैग तो फैक्ट्री में मशीन की मदद से बनते हैं, लेकिन पेपर बैग को एक गरीब आदमी अपने घर पर भी बना सकता है और लोकल लेवल पर उसे आसानी से बेच भी सकता है। इससे उन्हें रोजगार भी मिल सकता है।एनएफ.
प्लास्टिक बैग से गंदगी बढ़ती है और यह लंबे समय तक नष्ट भी नही हो पाता है और इसके कारण मिट्टी भी प्रदूषित हो जाती है। लोगों को इसको समझना चाहिए और पेपर बैग का ही इस्तेमाल करना चाहिए। आपको बता दें कि प्लास्टिक बैग में रखने वाले खाद पदार्थ भी दूषित हो जाते हैं। प्लास्टिक की बोतल में पानी रखने से पानी की गुणवत्ता भी कम हो जाती है।
ऐसे प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचें
पेपर या जूट के बने व मिट्टी के पारंपरिक तरीके से बने बर्तनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दें। प्लास्टिक सामान को कम करने की कोशिश करें।
प्लास्टिक बैग और पोलिएस्ट्रीन फोम को कम से कम इस्तेमाल करने की कोशिश करें।
खुद प्लास्टिक को खत्म करने की कोशिश न करें।
न पानी में, न जमीन पर और न ही जमीन के नीचे प्लास्टिक खत्म होता है।
इसे जलाना भी पर्यावरण के लिए अत्यधिक हानिकारक है।
क्लोजिंग
प्लास्टिक बैग्स से होने वाले नुकसान की जानकारी अपने आप में नाकाफी है जब तक इसके नुकसान जानने के बाद ठोस कदम न उठाए जाएं। सरकार और पर्यावरण संस्थाओं के अलावा भी हर एक नागरिक की पर्यावरण के प्रति कुछ खास जिम्मेदारियां हैं जिन्हें अगर समझ लिया जाए तो पर्यावरण को होने वाली हानि को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। खुद पर नियंत्रण इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है।
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