पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...
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दीपक कुमार तिवारी
स्माइल क्राफ्ट ऑर्थो डोंटिस्ट विनीत सिंह की कलम से📝📝📝 आज के परिवेश और खानपान की आदतों के कारण बच्चों में दांतो की बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। एक सर्वे के अनुसार भारत में 92 प्रतिशत बच्चे दांतों में कीड़ा लगने की बीमारी से ग्रस्त हैं। ज्यादातर बच्चों में दांतो की बीमारियां जैसे टेढ़े - मेढे दांत, मुंह में बदबू, दांतों में गंदगी जमना आदि पाई जाती है। इनमें से 70 प्रतिशत बीमारियां ठीक से ब्रश ना करना, जंक फूड खाना, टॉफी और चॉकलेट खाने से होती है। इस तरह का खाना दांतों में चिपक जाता है, जिसके कारण मुंह में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं और दांतों को जल्दी सड़ा देते हैं। दूध के दांत में कीड़ा लगने का मुख्य कारण रात को दूध पीकर सोना और ब्रश ना करना है। अगर छोटी उम्र में ही दांतो को कीड़ा लग जाए तो इंफेक्शन हड्डी तक पहुंच सकता है और आने वाले पक्के दांत को भी खराब कर सकता है। आम धारणा के कारण लोग यह सोचकर दूध के दांतों का इलाज नहीं करवाते क्योंकि दूध के दांतों का इलाज नहीं करवाते क्यों की यह दांत तो टूट जाएंगे और इनके जगह पक्के सही दांत आ जाएंगे, परंतु ऐसा नहीं है क्योंकि दूध के दांतों का भी अपना महत्व है।
दूध के दांत बच्चों के पोषण के लिए आवश्यक है और अगर बच्चा दांत खराब होने के कारण खाना नहीं खा पाएगा तो उसमें कमजोरी आ जाएगी।
अगर दूध के दांत अपने समय से पहले या बाद में टूटते हैं, तो आने वाले पक्के दांत टेढ़े - मेढ़े आते हैं। इसीलिए समय-समय पर दूध के दांतों की जांच विशेषज्ञ के द्वारा करवाएं। जिन बच्चों के दांतों में कीड़ा लग जाता है उन्हें फिलिंग या आरसीटी द्वारा बचाया जा सकता है कुछ बच्चों में अंगूठा चूसना, होठ चबाने जैसी आदतें पाई जाती है। जिसके कारण दांत टेढ़े - मेढ़े हो जाते हैं। इन आदतों को विशेषज्ञ द्वारा सही समय पर इलाज करवा कर छुड़वाया जा सकता है जिससे दांत टेढ़े - मेढ़े नहीं आते।
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