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चेचनहा विद्यालय में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

पलामू समाचार केंद्र पाटन प्रतिनिधि रामाशीष कुमार मो:- 6202682271 नावा बाजार (पलामू) जल संरक्षण पखवाड़ा 2026 के तहत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय,चेचनहा में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष व सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार महतो उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार की अहम भूमिका रही। वहीं सहायक शिक्षक  निशांत भास्कर,राजेश कुमार गुप्ता,संयोजिका शारदा देवी एव उप संयोजिका रामपति देवी, सरिता देवी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन का आध...

बिहार में दो एम्स खोलने वाली मोदी सरकार क्यों रद्द करना चाहती है झारखंड के तीन मेडिकल कॉलेज की मान्यता, झारखंड की शिक्षा पर सियासत, फ्यूज बल्ब गैंग मौन क्यों ? बड़ा सवाल - मोदी सरकार क्यों छीनना चाहती है दुमका, हज़ारीबाग़ और पलामू मेडिकल कॉलेज

पलामू समाचार केंद्र
दीपक कुमार तिवारी
+917979886793
झारखंड के तीन मेडिकल कॉलेज की मान्यता खतरे में है. सबसे दुखद बात ये है की इन कॉलेजो में नामांकन लेने वाले छात्रों का भविष्य भी अब अधर में लटक गया है. दुमका, पलामू और हज़ारीबाग़ मेडिकल कॉलेज की मान्यता बचाने के लिए राज्य की हेमंत सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार को अनुरोध पत्र लिखा है. कोरोना काल की वजह से इन तीनो मेडिकल कॉलेजो के भवन का आंशिक निर्माण बचा हुआ था, जिसका बहाना बनाकर अब दुमका, हज़ारीबाग़ और पलामू मेडिकल कॉलेज की मान्यता ही केंद्र सरकार समाप्त करना चाहती है. इसके लिए पूरी नामांकन प्रक्रिया को रोक दिया गया है. जिसपर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आपत्ति जताई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि तीनों मेडिकल कॉलेज चालू हो चुके हैं. आधारभूत संरचना और कर्मचारियों में कुछ कमी जरूर थी, जिसे पूरा करने का काम तेजी से चल रहा है. आधारभूत संरचना में लगभग 90-95 फीसदी काम हो चुका हैं. अब इन तीनों कॉलेजों को डिबार कर दिया गया है. बच्चे नामांकन नहीं ले सकते हैं. जबकि देवघर एम्स का काम पांच फीसदी भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन उसे डिबार नहीं किया गया है।

उधर मुख्यमंत्री की बेचैनी है तो इधर विपक्ष का मौन. झारखंड के साथ हो रहे इस दुर्व्यवहार पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार अपनी आवाज उठा रहे है, मगर सूबे में 'फ्यूज बल्ब गैंग' को झारखंड के जनसरोकार से मानो कोई लेना देना ही नहीं है. ना तो बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों ने अबतक केंद्र सरकार से इन तीनो मेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर कोई आग्रह किया है, ना ही पत्रवीरो ने कोई पत्र लिखा है।

बड़ा सवाल 

क्या फ्यूज बल्ब गैंग झारखंड में केवल राजनीति करने के लिए है ? 

 क्या झारखंड की अधिकारों की बात करने की जिम्मेदारी सिर्फ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की है, बाकी सब सियासत के लिए बैठे है ? 

 झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कब बंद करेगी मोदी सरकार ?

 शिक्षा पर ये मेरी सरकार, ये तुम्हारी सरकार क्यों ?

 झारखंडी छात्रों के भविष्य पर प्रहार को क़ुतुब मीनार गैंग का मौन समर्थन क्यों ?

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